'बिना प्रोफेशनल ट्रेनिंग के शेयर बाजार जरूर जुआ है'

नीलेश बोहरा, टेक्निकल एनालिस्ट (Equity, F&O), 
फ्रीलांस कंसल्टेंट और ट्रेनर
नीलेश आज Equity (Cash), F&O और Commodity के सफल  फुल टाइम ट्रेडर हैं। उन्होंने बड़ी IT कंपनी की भारी-भरकम सैलरी वाली नौकरी छोड़कर फुल टाइम ट्रेडर का काम कर रहे हैं। वो खुद के लिए ही ट्रेडिंग करते हैं। इसके साथ ही वो फ्रीलांस कंसल्टेंट और ट्रेनर भी हैं। नीलेश चाहते तो कई दूसरे शेयर बाजार के इन्वेस्टर और ट्रेडर की तरह बिना कोई प्रोफेशनल ट्रेनिंग के ही शेयर बाजार में पैसे लगाना जारी रख सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।  

उन्होंने सबसे पहले Motilal Oswal Financial Services और Online Trading Academy से  Technical Analysis और Advanced Options Trading से टेक्निकल एनालिसिस पर सर्टिफिकेट कोर्स किया। उनका मानना है कि प्रोफेशन कोई भी हो बिना किसी प्रोफेशनल ट्रेनिंग का उसमें जाना नुकसान को न्यौता देना है। इसलिए वो शेयर बाजार में निवेश करने के लिए आने वालों को पहले प्रोफेशनल कोर्स करने की सलाह देते हैं, अगर उन्होंने शेयर बाजार में निवेश पर कोई ट्रेनिंग नहीं ली है तो। साथ ही नीलेश के अनुभव से आप विस्तार से जान पाएंगे कि शेयर बाजार क्यों FD/MIS/KVP से बेहतर निवेश विकल्प है। कामयाब ट्रेडर होने के बावजूद नीलेश का शेयर मार्केट से सीखना जारी है। नीलेश बोहरा से beyourmoneymanager ने खास बातचीत की। इस बातचीत के खास अंश...

1-beyourmoneymanager:  अब तक का ट्रेडिंग और ट्रेनिंग का सफर कैसा रहा है?  कितने संतुष्ट हैं आप इससे?

नीलेश: जिंदगी की तरह मेरा ट्रेडिंग और निवेश का सफर भी उतार-चढ़ाव भरा रहा। दूसरों की तरह मैं भी समझता था कि शेयर बाजार एक गैन्बलिंग या सट्टा है। मुझे पहले शेयर बाजार का कोई ज्ञान नहीं था। मेरी पहली जॉब विदेश में लगी थी और मैंने अपनी सारी बचत एफडी, पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (एमआईएस) और किसान विकास पत्र (केवीपी) में लगाया था। मैं मुंबई में एक घर खरीदना चाहता था जिसके लिए मैं बचत कर रहा था. लेकिन जब मैं 2004 में इंडिया वापस आया तब मैं आश्चर्यचकित हो गया ये देखकर कि मेरी बचत कुछ ज्यादा बढ़ी नहीं और मेरे पास घर खरीदने के लिए पैसे कम पड़े। और (एमआईएस)/ केवीपी तोड़ने पर थोड़ी पेनाल्टी भी लगी थी. तभी मैंने जाना की एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट), एमआईएस (मंथली इनकम स्कीम-मासिक बचत योजना), केवीपी (किसान विकास पत्र) या ऐसे किसी भी तरह के फिक्स्ड इंस्ट्रूमेंट में कभी पैसे नहीं लगाना चाहिए क्योंकि इनमें महंगाई से लड़ने की क्षमता नहीं होती और इससे अपने पैसे की ग्रोथनहीं होती है। फिर मैंने बैंक से कर्ज लेकर अपने लिए घर खरीदने और कुछ समय के बाद एफडी/एमआईएस केवीपी को तोड़ कर मैंने अपने लोन की प्री पेमेंट करके अपने कर्ज का ब्याज कम किया। 

तभी मैंने पहली बार म्युचुअल फंड्स के बारे में जाना. अभी भी मुझे ऐसा ही लगता था कि शेयर बाजार भी एक जुआ है। लेकिन मुझे ये बताया गया था कि म्युचुअल फंड बेहतर है क्योंकि इसे प्रोफेशनल मैनेज करते हैं। फिर मैंने कुछ एकसाथ बड़ी रकम (lump sum) और एसआईपी (सिस्टैमिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के द्वारा म्युचुअल फंड में निवेश करना शुरू किया। लेकिन फिर मार्केट में 2006 की गिरावट और 2008 के क्रैश के कारण म्युचुअल फंड में भी मुझे काफी नुकसान हो गया। इससे मैं थोड़ा डर गया। और कुछ समय के लिए एसआईपी रोक दी, जो एक गलती थी। बहुत लोग ऐसा करते हैं। लेकिन ऐसे समय में भी एसआईपी को जारी रखना चाहिए। हालांकि, कुछ समय बाद मैंने फिर से म्युचुअल फंड में निवेश करना शुरू कर दिया। दूसरी परेशानी ये भी थी कि बहुत सी म्यचुअल फंड्स स्कीम्स में से सही स्कीम कैसे चुनें। फिर इसके लिए मैं कुछ म्युचुअल फंड की अच्छी वेबसाइट्स पर रिसर्च करने लगा।

उसी दौरान मैंने खुद से शेयर बाजार को स्टडी करना शुरू कर दिया। तभी मैंने फंडामेंटल एनालिसिस पर कुछ किताबें पढ़ी और PE (price-to-earnings ratio), P/BV ((price-to-Book Value ratio), PEG (Price Earning Growth) ऐसा कुछ रेश्यो एनालिसिस के बारे में सीखा। मैं स्टॉक ब्रोकर्स की रिपोर्ट पढ़ता था, टीवी देखता था, इंटरनेट पर रिसर्च करता था। फिर मैंने उस नॉलेज के आधार पर 2007 में खुद से डायरेक्ट इक्विटी में इन्वेस्ट करना शुरू कर दिया। 2007 की रैली की वजह से मेरे निवेश में काफी ग्रोथ हुई। तो मुझे लगने लगा कि मैं सही राह पर हूं और मैं निवेश करना सीख गया हूं। लेकिन 2008 के क्रैश ने मुझे मेरी जगह दिखाई और मुझे काफी नुकसान हुआ। और दूसरों की तरह मैं भी लांग टर्म इन्वेस्टर हो गया और अपने नुकसान के रिकवर होने का इंतजार करता रहा। दुर्भाग्यवश PE (Price Earning)/ PEG (Price Earning Growth) के चलते मैंने बहुत सी छोटी-मझोली ( Small-Mid size) कंपनियों में निवेश किया था। इसलिए मेरा नुकसान ज्यादा हो गया, क्योंकि ऐसे क्रैश में छोटी-मझोली कंपनियां ज्यादा पीटती है। इनमें से काफी कंपनियों के नुकसान से मैं कभी उबर नहीं पाया और मुझे बाद में बड़ा नुकसान बुक करना पड़ा। 

शेयर बाजार के मेरे इन बुरे अनुभवों की वजह से मैं ये सोचने पर मजबूर हो गया कि आखिर मैं गलत कहां हूं? क्या सच में हमलोग शेयर बाजार से पैसे नहीं कमा सकते? क्या सच में शेयर बाजार एक जुआ है? लेकिन अगर ये सब सच है तो जिन लोगों ने पैसा कमाया है उन्होंने कैसे कमाये? इसी दौरान किसी दोस्त के द्वारा मुझे एक मौका मिला ये समझने का कि शेयर बाजार एक प्रोफेशन है और जब तक हम इसमें प्रोफेशनल ट्रेनिंग नहीं लेते इससे पैसे कमाना बहुत मुश्किल है। लेकिन अगर हम प्रोफेशनली ट्रेन्ड हों तो इसमें बहुत (अनलिमिटेड) पैसा है। 

तब मैंने टेक्निकल एनालिसिस की प्रोफेशनल ट्रैनिंग ली। ट्रेनिंग पर मैंने काफी पैसे खर्च किए या आज ये कह सकते हैं कि इन्वेस्ट किया। और तब शेयर बाजार में मेरी प्रोफेशनल ट्रेडिंग की शुरुआत हुई। शुरू में ट्रेनिंग लेने के बावजूद मैंने काफी गलतियां की क्योंकि इमोशंस में बहकर मैंने ट्रेनिंग के दौरान सिखाए गए नियमों को तोड़ा। इस वजह से ट्रेडिंग के शुरुआती दौर में मुझे खासा नुकसान उठाना पड़ा। फिर मैंने अपने गुरुजी की सलाह और गाइडेंस से ये निश्चय किया कि मैं अपनी ट्रेनिंग के अनुसार ही चलूंगा और अपने ट्रेडिंग प्लान और 
ट्रेडिंग के नियमों का पालन करूंगा। एक सफल ट्रेडर बनने के लिए अनुशासन और धैर्य बहुत जरूरी है। धीरे-धीरे समय और प्रैक्टिस के साथ मेरी ट्रेडिंग स्किल बहुत सुधरी है। कुछ साल की प्रोफेशनल ट्रेडिंग के बाद जब मैं Consistent Profitable हो गया तब मैंने निश्चय किया कि अब मैं ट्रेडिंग को ही अपना कैरियर बनाउंगा। मैंने अपनी lucrative और अच्छी तनख्वाह वाली जॉब छोड़ दी और पिछले दो साल से अधिक समय से मैं फुल टाइम ट्रेडर हूं। अभी मैं सिर्फ अपने लिए ट्रेडिंग करता हूं लेकिन मेरे फ्यूचर प्लान हैं कि मैं इस कारोबार को और आगे ले जाऊं और लोगों के पैसों को प्रोफेशनली मैनेज करूं और ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्रोफेशनली ट्रेनिंग दूं। 

तो ये है अभी तक का मेरा शेयर बाजार का सफर। बहुत कुछ सीखा है और बहुत सीखना बाकी है। मार्केट हमें रोज सीखाता है और सीखना कभी बंद नहीं करना चाहिए। 

2-beyourmoneymanager: IT कंपनी की शानदार जॉब छोड़कर आपने जोखिमभरे शेयर बाजार का फील्ड चुना था। इसके पीछे कोई खास वजह ? क्या आप भविष्य को लेकर चिंतित नहीं हुए थे? 

नीलेश: इसकी एक खास वजह ये है कि मैं अपने जॉब से संतुष्ट नहीं था। मुझे अब इस जॉब में जॉब संतुष्टि (Job Satisfaction) नहीं मिल रही थी। मुझे ऐसा लगने लगा था कि मैं इसे अपना मन मारकर कर रहा हूं। ये मेरा जुनून ( Passion) नहीं रहा। और वक्त के साथ जैसे मेरी तरक्की हुई, मेरी पोस्ट बढ़ी, ज्यादा जिम्मेदारी का बोझ भी सर पर आ गया जिससे काफी stress होने लगा जिससे मेरी सेहत पर बुरा असर होने लगा। इसलिए मैंने शेयर बाजार में ट्रेनिंग का रास्ता चुना ताकि मैं एक दिन जॉब से मुक्त हो जाऊं। और ज्यादा करके लोग अपनी जॉब में खुश नहीं हैं लेकिन पैसे कमाना है, घर चलाना है करना पड़ता है। मैं भी इसलिए अपनी जॉब में टिका हुआ था। 
पहले कुछ साल मैंने अपनी जॉब के साथ-साथ पार्ट टाइम ट्रेडिंग भी करता रहा। लेकिन जब मैंने ट्रेडिंग में एक मुकाम हासिल कर ली तब मैंने निश्चय कर लिया कि जॉब नहीं करूंगा और ट्रेडिंग को ही अपना फुल टाईम कैरियर बनाऊंगा और साथ-साथ कुछ फ्रीलांस काम भी करूंगा।मुझे अपने भविष्य को लेकर पहले थोड़ी चिंता थी क्योंकि मैं अपने परिवार का एकलौता कमाऊ सदस्य था और मुझे अपने परिवार का खर्च भी चलाना था। लेकिन थोड़ी प्लानिंग के साथ मैंने ये कदम उठाय। पहले मेरे परिवार वाले भी इसके खिलाफ थे लेकिन मुझे अपनी ट्रेडिंग स्कील्स पर और मार्केट में मिलने वाले सुहाने मौके पर भरोसा था। और जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए कुछ जोखिम उठाना पड़ता है, लेकिन कैलकुलेटेड रिस्क और प्लानिंग के साथ। आज मैं अपने इस फैसले से खुश हूं। 


3-beyourmoneymanager:बहुत सारे लोग बिना किसी खास ट्रेनिंग के ही शेयर बाजार में ट्रेडिंग या इन्वेस्टमेंट शुरू कर देते हैं, लेकिन आपने ऐसा नहीं किया, क्यों? 
नीलेश: पहले सवाल में इसका जवाब दे चुका हूं। 

4-beyourmoneymanager: बाजार में, इंटरनेट पर शेयर बाजार में इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग के गुर सीखने के लिए बहुत सारी सामग्री मौजूद है, फिर भी आपने प्रोफेशनल ट्रेनिंग लेने का विचार किया। ये कितना फायदेमंद साबित हो रहा है, आपके लिए? 

नीलेश: ये मेरे लिए बहुत फायदेमंद साबित हुआ है। आज मैं शेयर बाजार से अच्छे पैसे कमा रहा हूं, सिर्फ इसी ट्रेनिंग की वजह से। आज मैं अपने IT प्रोफेशन से रिटायर हूं और अपना काम खुद कर रहा हूं सिर्फ इसी ट्रेनिंग की वजह से। दुनिया भर में ऐसे बहुत सफल लोग हैं जो प्रोफेशनल ट्रेनिंग लेकर अपनी जॉब छोड़कर आज फुल टाइम ट्रेडर हैं। इसकी संख्या अमेरिका/  विदेश में ज्यादा है क्योंकि वहां जागरूकता (अवेयरनेस) ज्यादा है। हिन्दुस्तान में इसको लेकर जागरूकता की कमी है। लोग आज भी इसे रिस्क और सट्टा (गैम्बलिंग) समझते हैं और अपना पैसा एफडी में लगा कर बर्बाद कर रहे हैं। इसलिए मैं अपने सेमिनार के माध्यम से जागरूक करने की कोशिश कर रहा हूं। अब इसमें कितना सफल रहता हूं, ये तो वक्त ही बताएगा। 

5-beyourmoneymanager: शेयर बाजार में इन्वेस्टमेंट या ट्रेडिंग के लिए प्रोफेशनल ट्रेनिंग कितना जरूरी है?  

नीलेश: बेहद जरूरी है। प्रोफेशनल ट्रेनिंग के बिना हम किसी भी प्रोफेशन में अपना काम नहीं कर सकते हैं। हमें ये समझना बेहद जरूरी है कि शेयर बाजार भी एक प्रोफेशन है। बिना प्रोफेशनल ट्रेनिंग के किसी को भी शेयर बाजार में अपना पैसा नहीं लगाना चाहिए। मैं आज भी अपने आपको और बेहतर बनाने के लिए ट्रेनिंग लेने से पीछे नहीं हटूंगा। 
अगर कोई सीखना नहीं चाहते तो फिर उनको म्युचुअल फंड या PMS के द्वारा ही अपना पैसा शेयर मार्केट में लगाना चाहिए। उनके लिए एसआईपी (सिस्टैमिक इन्वेस्टमेंट प्लान ) एक अच्छा तरीका है। लेकिन उनको समझना पड़ेगा कि म्युचुअल फंड या पीएमएस के द्वारा उनको विंडफॉल गेन्स नहीं मिल सकता है। उन्हें सालाना 15-20% रिटर्न से संतुष्ट होना पड़ेगा। इससे ज्यादा की उम्मीद ना करें। फिर भी ये एफडी या दूसरे फिक्स्ड इंस्ट्रूमेंट से बेहतर विकल्प है। 

6-beyourmoneymanager: आमतौर पर कितने दिनों की प्रोफेशनल ट्रेनिंग के बाद एक आम निवेशक को इन्वेस्टमेंट या ट्रेडिंग शुरू कर देनी चाहिए? 

नीलेश: ये व्यक्ति की काबिलियत और उसके सीखने की क्षमता पर निर्भर करता है। जब उसे थोड़ा भरोसा हो जाए तो उसे शुरूआत कर देनी चाहिए। शुरुआत धीरे-धीरे करनी चाहिए। कोई भी हुन्नर जब हम सीखते हैं, हम तुरंत एक्सपर्ट नहीं बन जाते, इसमें वक्त लगता है। जब हम गाड़ी सीखते हैं तो सीधे हायवे पर या आउटस्टेशन नहीं ले जाते हैं। या जब हम स्वमिंग सीखते हैं तो सीधे गहराई (डीप) में नहीं कूद जाते हैं।

हमें ट्रेडिंग के दौरान ये भी ये ख्याल रखना है। और ट्रेडिंग शुरू करने से पहले एक ट्रेडिंग प्लान बनाना बहुत जरूरी है और साथ ही जरूरी है प्लान के मुताबिक ही ट्रेडिंग करने की। ये भी ध्यान रखें कि ट्रेनिंग में सीखाये गए नियमों को ना तोड़े खास कर के रिस्क मैनेजमेंट के नियम बेहद जरूरी हैं। 
  
7-beyourmoneymanager:भारत की आबादी 125 करोड़ और शेयर बाजार निवेशकों की संख्या महज करीब 3.25 करोड़। आपको  नहीं लगता देश में Investment Culture बढ़ाने की जरूरत है? आखिर इसमें कमी कहां है? 

नीलेश: मैं आपसे बिल्कुल सहमत हूं। देश में निवेश को लेकर जागरूकता फैलाने की बहुत जरूरत है। इस दिशा में मैं अपने सेमिनार के माध्यम से जागरूकता फैलाने की कोशिश कर रहा हूं। सभी निवेशकों को ये समझना चाहिए कि सही निवेश वही है जहां टैक्स कटने के बाद जो रिटर्न मिलते हैं वो महंगाई दर से ज्यादा 
हो। इस मापडंद पर एफडी, एमआईसी, केवीपी, छोटी बचत योजनाएं जैसे निवेश साधन खरे नहीं उतरते हैं। शेयर बाजार इस मापदंड पर खरा उतरता है। शेयर बाजार में निवेश हमारे सुनहरे आर्थिक भविष्य और अपने आर्थिक लक्ष्य  ( Financial Goals & Financial Freedom) के लिए बेहद जरूरी है। ये जागरूकता लाना बहुत ही मुश्किल और चुनौतीपूर्ण काम है। लोगों के मन में आज भी शेयर बाजार का बहुत डर भरा हुआ है। लोग सीखे बिना सिर्फ लालच और कुछ लोगों के बहकावे में आकर शेयर बाजार में कूद जाते हैं। इसके चलते ये भी एक सच्चाई है कि रिटेल ट्रेडर्स में से 90% शेयर बाजार में पैसे गंवाते हैं। ज्यादा करके अंजान रिटेल निवेशक नुकसान में बैठे रहते हैं और वो अपने आपको लांग टर्म इन्वेस्टर के नाम पर तसल्ली देते रहते हैं। इससे शेयर बाजार के बारे में और भी गलत संदेश जाता है और लोगों में डर फैलता है। उन्हें लगता है कि एफडी तो सुरक्षित है, इसलिए बिना सोचे-समझे वो सिर्फ डर के चलते अपने पैसे एफडी में लगाकर अपने पैसे को बर्बाद कर रहे हैं।   

8-beyourmoneymanager: धन्यवाद, नीलेश जी, हमारे पाठकों को बहुमूल्य जानकारी देने और प्रोफेशनल ट्रेनिंग की अहमियमत बताने के लिए। 
नीलेश: आपका भी बहुत धन्यवाद। शेयर बाजार पर मुझे इतनी जानकारी देने का मौका देने के लिए। 

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