शेयर बाजार के निवेशकों के लिए कंपनियों के नतीजे के मायने -भाग-1

कंपनियों के नतीजे को सिर्फ आंकड़ा ना समझें निवेशक-भाग-1

जिस तरह से हर चुनाव में कौन सी पार्टी या किस शख्सियत की पार्टी की जीत होगी, उसपर गंभीरता से हमारी नजर रहती है, क्योंकि हम हमेशा चाहते हैं कि सरकार हमारी पसंद की बने, उस पार्टी की जीत हो, जो हमारी उम्मीदों पर खरा उतरा, उस शख्सियत का हाथ मजबूत हो, जो देश में या राज्य में या स्थानीय स्तर पर अमन, चैन कायम कर सके।

ठीक उसी तरह शेयर बाजार में भी पैसे लगाने वालों को कंपनियों के नतीजे पर नजर रखने की जरूरत है। आप इस बात को समझ लीजिए कि आपने जिस भी कंपनी में पैसा लगाए हैं, आप उसमें एक हिस्सेदार हैं, इसलिए उस कंपनी के प्रदर्शन पर नजर रखना आपका दायित्व है। आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि जब कंपनी सही प्रदर्शन करेगी, तभी उस कंपनी में लगा पैसा अच्छी रिटर्न देगा, वरना सिर्फ शेयर बाजार निवेशक कहलाना कहीं से सही नहीं है।

हर तिमाही में कंपनियां अपने नतीजे पेश कर सकती है। ऐसे में आपको नतीजों में क्या-क्या देखना चाहिए और नतीजों का एक सतर्क निवेशक होने के नाते आपके लिए क्या महत्व है...आइए हम आपको बताते हैं...   

1-तिमाही नतीजे कंपनी के प्रदर्शन का संकेत देते हैं जिसके आधार पर बाजार के एक्सपर्ट और निवेशक कंपनी के बारे में अपनी धारणा या रणनीति बनाते हैं। यानी निवेश की रणनीति बनाने में कंपनियों के तिमाही नतीजे महत्वपूर्ण होते हैं।

2-इसमें अगली तिमाही और वित्त वर्ष के लिए कारोबार के बारे में प्रबंधन (मैनेजमेंट) का अनुमान होता है। अगर प्रबंधन बेहतर अनुमान देता है तो निवेशक या जानकार उस कंपनी के शेयरों में खरीदारी की रुचि दिखाते हैं। अगर अनुमान खराब होता है तो शेयरों में बिकवाली बढ़ जाती है।

3-नतीजे अगर अनुमान से बेहतर रहते हैं तो शेयर के दाम चढ़ते हैं, लेकिन अगर अनुमान से खराब या कम रहते हैं तो इनमें गिरावट की भी संभावना रहती है।

4- कई बार कुछ कंपनियों के नतीजे कई तिमाहियों तक उम्मीद से कम रहते हैं तो हो सकता है कि कंपनी समस्याओं का सामना कर रही हो या फिर आर्थिक वातावरण कंपनी के अनुकूल नहीं हो। लगातार मंदी में कंपनियों के प्रदर्शन पर असर पड़ता है।

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कंपनियों के नतीजे को सिर्फ आंकड़ा ना समझें निवेशक-भाग-2
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