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अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को मिले-जुले रहे, डाओ जोंस गिरा, नैस्डेक चढ़ा
अमेरिकी और यूरोपीय शेयर बाजार शुक्रवार को मिलेजुले रुझान के साथ बंद हुए। 

अमेरिका के डाओ जोंस ने 9.64 अंक की नरमी जबकि  S&P 500 ने 1.62 अंक और नैस्डेक ने 4.23 अंकों की मामूली बढ़त दर्ज की। उधर, ब्रिटेन के FTSE 100 इंडेक्स ने 46.74 अंक और फ्रांस के कैक 40 ने 25.63 अंकों की तेती जबकि जर्मनी के डैक्स ने 7.68 अंकों की कमजोरी  के साथ कारोबार किया।  
((अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को गिरे, डाओ में लगातार 9 दिनों की तेजी पर ब्रेक 
(अमेरिकी-यूरोपीय बाजारों का प्रदर्शन-(शुक्रवार)
(एशियाई बाजारों का प्रदर्शन-(शुक्रवार)

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Rajanish kant Saturday, September 23, 2017
Interest Subsidy Scheme on home loans for MIG extended by another 15 months
Interest Subsidy Scheme on home loans for MIG extended by another 15 months

Subsidy of up to Rs.2.60 lakh now available till March, 2019

Centre to look in to concerns of real estate industry to meet affordable housing targets
मध्‍यम आय वर्गों (एमआईजी) के लिए होम लोन पर ब्‍याज सब्सिडी योजना की अवधि 15 माह और बढ़ाई गई
2.60 लाख रुपये तक की सब्सिडी अब मार्च, 2019 तक मिलेगी

केन्‍द्र सरकार किफायती आवास के लक्ष्‍यों की प्राप्ति के लिए अचल सम्‍पत्ति उद्योग की चिंताओं पर गौर करेगी

केन्‍द्र सरकार ने आज घोषणा की कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत होम लोन पर लगभग 2.60 लाख रुपये की ब्‍याज सब्सिडी का लाभ मध्‍यम आय वर्गों (एमआईजी) से संबंधित लाभार्थियों को इस साल दिसम्‍बर के बाद 15 और महीनों तक मिलेगी।
      इस आशय की घोषणा भारत सरकार के सचिव (आवास एवं शहरी मामले) श्री दुर्गा शंकर मिश्रा ने की। वह आज मुम्‍बई में एनएआरईडीसीओ द्वारा आयोजित अचल सम्‍पत्ति एवं बुनियादी ढांचा निवेशक शिखर सम्‍मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्‍होने कहा कि सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत ब्‍याज सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए एमआईजी लाभार्थियों को कुछ और समय देने का निर्णय लिया है।
      प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने पिछले साल 31 दिसम्‍बर को घोषणा कर प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत ऋण संबद्ध सब्सिडी योजना (सीएलएसएस) को इस साल दिसम्‍बर के आखिर तक एमआईजी के लिए भी मान्‍य कर दिया था। सीएलएसएस के तहत 6.00 लाख रुपये से ज्‍यादा और 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले एमआईजी लाभार्थियों को 9 लाख रुपये के 20 वर्षीय ऋण पर 4 फीसदी ब्‍याज सब्सिडी मिलेगी। वहीं, 12 लाख रुपये से ज्‍यादा और 18 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले लाभार्थियों को 3 फीसदी ब्‍याज सब्सिडी मिलेगी।
      वर्ष 2022 तक शहरी क्षेत्रों में सभी के लिए आवास लक्ष्‍यों की प्राप्ति के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का फिर से उल्‍लेख करते हुए श्री मिश्रा ने निजी निवेशकों से किफायती आवास में निवेश करने का अनुरोध किया, जिसे सरकार तरह-तरह के प्रोत्‍साहनों एवं रियायतों के साथ बड़े पैमाने पर प्रवर्तित कर रही है।
      श्री मिश्रा ने बाद में एनएआरईडीसीओ के 30 सदस्‍यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ एक घंटे बातचीत की और उन्‍हें आश्‍वासन दिया कि सरकार उनके द्वारा उठाये गये विभिन्‍न मुद्दों पर गौर करेगी तथा संभावित कदम उठाने पर विचार किया जाएगा।
      प्रतिनिधिमंडल ने पूर्ण एवं निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए तय जीएसटी दरों की विसंगतियों का भी उल्‍लेख किया।
प्रतिनिधिमंडल ने इस बात पर चिंता जताई कि आवासीय परिसंपत्तियों की लागत में जीएसटी एवं अन्‍य करों का योगदान एक तिहाई से भी ज्‍यादा है।
The central government today announced that the benefit of interest subsidy of about Rs.2.60 lakh on home loans under Pradhan Mantri Awas Yojana (Urban) will now be available for beneficiaries belonging to Middle Income Groups (MIG) fir fifteen more months beyond December this year.
This was announced by Shri Durga Shanker Mishra, Secretary (Housing & Urban Affairs), Government of India, while addressing the ‘Real Estate and Infrastructure Investors Summit’ organized by NAREDCO, in Mumbai today. He said that the government decided to give more time for MIG beneficiaries to avail interest subsidy under PMAY(Urban).
Prime Minister Shri Narendra Modi, in his announcement on the 31st of December last year made applicable the Credit Linked Subsidy Scheme (CLSS) under PMAY(Urban) to MIG, till the end of December this year. Under CLSS, MIG beneficiaries with annual income of above Rs.6.00 lakhs and up to Rs.12.00 lakhs would get an interest subsidy of 4.00% on a 20 year loan component of Rs.9.00 lakhs. Those with annual exceeding Rs.12.00 lakhs and up to Rs.18.00 lakhs would get interest subsidy of 3.00%.
Reiterating the Government’s commitment to meet the Housing for All targets in urban areas by 2022, Shri Mishra urged private investors to invest in affordable housing, being promoted by the Government in a big way with several incentives and concessions.
Shri Mishra later an hour long discussions with a 30 member delegation of NAREDCO and assured them that the Government would look into various issues raised by them in all sincerity and possible interventions would be considered.
The delegation referred to what they called anomalies in GST rates for completed and under construction housing projects, Stamp Duties being higher and kept outside the purview of GST, scarcity of land, delays in granting construction permits, lack of coordination among different municipal agencies, RBI’s high risk weightage for lending to real estate sector despite Real Estate Act coming into force, inadequate bank financing despite Non-Performing Assets in respect of construction being much less than other sectors etc.
The delegation expressed concern over GST and other taxes accounting for over one third of the cost of residential properties.
Minister of Housing & Urban Affairs Shri Hardeep Singh Puri, who addressed the summit yesterday suggested to NAREDCO to have a detailed discussion with Secretary(HUA) for resolving the issues so that affordable housing could be given a boost.
(Source: pib.nic.in)

Rajanish kant
Clarification about Transition Credit
Clarification about Transition Credit
ट्रांजिशन क्रेडिट के बारे में स्पष्टीकरण
मीडिया में जीएसटी-पूर्व अवधि के दौरान केन्‍द्रीय उत्‍पाद शुल्‍क और सेवा कर के संबंध में करदाताओं द्वारा दावा किये गये 65,000 करोड़ रुपये के क्रेडिट के बारे में व्‍यापक अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ लोगों की यह धारणा है कि ट्रांजिशन संक्रमणकालीन क्रेडिट के रूप में दावा की गई 65,000 करोड़ रुपये की राशि के कारण इस महीने सरकार की आय में गिरावट आई है।

सबसे पहले 65,000 करोड़ रुपये के इस क्रेडिट का करदाताओं द्वारा ट्रान्‍स-1 फार्म में अपने बकाया क्रेडिट के रूप में दावा किया गया है। इसका यह अर्थ नहीं है कि उन्‍होंने जुलाई, 2017 के लिए अपनी आउटपुट टेक्‍स देनदारी के भुगतान के लिए इस पूरे क्रेडिट का उपयोग कर लिया है।

यह भी स्‍पष्‍ट किया जाता है कि यह अटकल सच्‍चाई से दूर है। दूसरे यह भी स्‍पष्‍ट किया जाता है कि जीएसटी के लिए अगस्‍त, 2017 में 95,000 करोड़ रुपये की राशि प्राप्‍त हुई थी, जो क्रेडिट का लाभ लेने के अलावा वास्‍तव में नकद भुगतान की गई राशि है।

तीसरे दावा की गई ट्रांजिशन क्रेडिट राशि अविश्‍वसनीय रूप से बहुत अधिक नहीं है, क्‍योंकि विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 30 जून, 2017 को केन्‍द्रीय उत्‍पाद शुल्‍क और सेवा कर के मद में 1.27 लाख करोड़ रुपये की क्रेडिट राशि शेष जमा राशि के रूप में पड़ा था। इसमें केन्‍द्रीय उत्‍पाद शुल्‍क के साथ-साथ सेवा कर की राशि भी शामिल है। वास्‍तव में इनमें से कुछ क्रेडिट जीएसटी शासन के तहत मान्‍य नहीं है। उदाहरण के लिए सीजीएसटी अधिनियम की धारा 17 (5) के तहत क्रेडिट या जीएसटी की परिभाषा में शामिल नहीं किये गये क्रेडिट मान्‍य नहीं हैं। इसके अलावा ट्रान्‍स-1 फार्म में दावा किये गये कुछ क्रेडिट भी मान्‍य नहीं हैं, जो न्‍यायालय के विचाराधीन हैं, इसलिए करदाताओं के लिए अपने खातों में जोड़ना या उपयोग करना संभव नहीं है। इसी दृष्टिकोण से सीबीईसी कुछ मामलों में ट्रान्‍स-1 फार्म में करदाताओं द्वारा दावा किये गये ट्रांजिशन क्रेडिटों की जांच पड़ताल कर रहा है।

यह संभव है कि कुछ करदाताओं ने मान्‍य क्रेडिट से संबंधित ट्रान्‍स-1 फार्म को दाखिल करने में गलती की होगीं। इसलिए जीएसटी परिषद द्वारा ट्रान्‍स-1 फार्म में संशोधन की सुविधा देने का निर्णय लिया गया है। यह सुविधा अक्‍टूबर 2017 के मध्‍य तक उपलब्‍ध रहेगी और करदाताओं से अनुरोध है कि वे अपने ट्रान्‍स-1 फार्म को 31 अक्‍टूबर, 2017 से पहले संशोधित कर लें, ताकि वे स्‍वयं भी अपनी गलती को दूर कर सकें। 
There are lot of speculations in the media about the credit of Rs. 65,000 crore claimed by taxpayers in respect of Central Excise and Service Tax in the pre-GST period. Some people are under the impression that because of Rs. 65,000 crore claimed as transition credit, the income of Government this month has plummeted.
Firstly, Rs. 65,000 crore is the credit claimed by the taxpayers in the TRANS 1 form as their balance of credit. It does not mean that they would have used all of this credit for payment of their output tax liability for the month of July 2017.
It may be clarified that this is far from the truth. Secondly, it may be clarified that an amount of Rs. 95,000 crore, which was received in the month of August 2017 for GST, is the amount actually paid in cash other than availing credit.
Thirdly, this figure of transition credit claimed is also not incredibly high, since Rs.1.27 lakh crore of credit of Central Excise and Service Tax was lying as closing balance as on 30th June, 2017 as per department’s record. This includes credit in Central Excise as well as Service Tax. Of course, some of these credits may not be admissible under GST regime, for example the credits, which are blocked under Section 17 (5) of CGST Act or which are not covered under the definition of GST. Also, some of the credits, which are claimed in TRANS 1 form may be under litigation and, therefore, it may not be available to the assesse to carry forward or utilisation. It is from this angle that CBEC is examining the transition credits, which are claimed by the assessees in TRANS I form in certain cases.
It is possible that some assessees would have committed mistake in filing TRANS 1 form of admissible credit. It has, therefore, been decided to provide facility for revision of TRANS 1 by the GST Council. This facility would be available by middle of October 2017 and assessees are requested to revise their TRANS 1 form before 31st October, 2017, so that they themselves can remove the error.
(Source: pib.nic.in)

Rajanish kant
Media reports on Blockage of Working Capital of Exporters are baseless: Govt
Blockage of Working Capital of Exporters
निर्यातकों की कार्यशील पूंजी पर रोक लगाना
वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू किये जाने के बाद निर्यातकों की कार्यशील पूंजी पर रोक लगाने की समस्‍या को लेकर मीडिया में व्‍यापक आशंकाएं जताई जा रही हैं। इस तरह की राशि पर रोक लगाये जाने के संबंध में विभिन्‍न तरह के आंकड़ों पर चर्चाएं भी की जा रही हैं, जो ख्‍याली अनुमान हैं। मीडिया में आई इस तरह की रिपोर्ट तथ्‍यों पर आधारित नहीं हैं। 

सबसे पहले इस बात का उल्‍लेख किया जा सकता है कि निर्यात के 66 फीसदी मूल्‍य के संबंध में निर्यातकों ने जीएसटी पूर्व व्‍यवस्‍था में इनपुट टैक्‍स का वास्‍तविक रिफंड लेने के बजाय ड्यूटी ड्रॉबैक स्‍कीम को वरीयता दी है। जीएसटी लागू होने के बाद ड्यूटी ड्रॉबैक स्‍कीम की अवधि को वास्‍तव में तीन माह अर्थात 30 सितम्‍बर, 2017 तक बढ़ा दिया गया। इसके तहत शर्त यह रखी गई कि निर्यातक ने जीएसटी के तहत इनपुट टैक्‍स क्रे‍डिट न लिया हो। इसका मतलब यही है कि अब त‍क निर्यात के 66 फीसदी मूल्‍य के लिए धनराशि पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। 

शेष 33 फीसदी निर्यातक केन्‍द्रीय उत्‍पाद शुल्‍क के लिए अलग से एवं वैट के लिए भी अलग से इनपुट (कच्‍चे माल) पर अदा किये गये करों के लिए सामान्‍य रिफंड रूट को सदा ही वरीयता देते थे और यह उन्‍हें केवल तभी उपलब्‍ध कराया गया, जब निर्यात वास्‍तव में हो जाया करता था। इस तरह के निर्यातकों के मामले में कम से कम 5-6 महीनों की अवधि के लिए धनराशि पर सामान्‍य रोक पहले भी लगाई जाती थी। इनमें अग्रिम अधिकार पत्र की सुविधा का उपयोग करने वाले निर्यातक शामिल नहीं हैं। अत: समस्‍या उतनी गंभीर नहीं है, जितनी बताई जा रही है। इसके बावजूद निर्यात पर गठित समिति निर्यात क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर काम कर रही है। 

कई लोग इस तरह की अटकलें लगा रहे हैं कि जीएसटी के तहत निर्यात के मामले में कच्‍चे माल पर रिफंड केवल तभी मिलेगा, जब प्रत्‍येक म‍हीने नियमित फॉर्म जीएसटीआर-3 दाखिल किया जाएगा। हालांकि, ऐसी बात नहीं है। हम फॉर्म जीएसटीआर-3बी के साथ फॉर्म जीएसटीआर-1 को लिंक करके रिफंड देने का तरीका ढूंढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। अत: जुलाई माह के लिए, जिस दौरान फॉर्म जीएसटीआर-1 पहले ही दाखिल किया जा चुका है, अधिकारीगण रिफंड आवेदनों की प्रोसेसिंग करने की स्थिति में होंगे। इसलिए जिन निर्यातकों ने जुलाई, 2017 के लिए फॉर्म जीएसटीआर-1 को अब तक दाखिल नहीं किया है, उन्‍हें यह सलाह दी जा सकती है कि वे इसे तत्‍काल दाखिल कर दें और तय समयसीमा का इंतजार न करें। रिफंड से संबंधित जीएसटीएन आवेदन पत्र को भी तैयार किया जा रहा है। लेकिन इस बीच हम रिफंड देने के अन्‍य तरीके भी ढूंढ रहे हैं। यदि आवश्‍यक हुआ, तो मैनुअल प्रक्रिया के जरिेये भी हम रिफंड कर सकते हैं। 

जीएसटी परिषद द्वारा गठित निर्यात पर समिति की बैठक 19 एवं 20 अगस्‍त, 2017 को हुई थी और इस दौरान निर्यातकों के लिए धनराशि पर रोक लगाने के मुद्दे को सुलझाने के विभिन्‍न तरीकों पर चर्चा हुई थी। समिति ने इस दौरान आठ क्षेत्रों के उन निर्यातकों के साथ बातचीत भी की थी, जिन्‍होंने खुद के समक्ष मौजूद विभिन्‍न समस्‍याओं के बारे में विस्‍तृत प्रस्‍तुतियां दी थीं। समिति जल्द ही जीएसटी परिषद के समक्ष इन निर्यातकों की समस्‍याओं का समाधान प्रस्‍तुत करेगी। 

इस बीच राज्‍य सरकारों के साथ-साथ केन्‍द्र सरकार के अधिकारियों से आग्रह किया गया है कि वे जीएसटी लागू होने से पहले की अवधि वाले केन्‍द्रीय उत्‍पाद शुल्‍क एवं वैट के लंबित रिफंड दावों का निपटारा कर दें, ताकि निर्यातकों को तत्‍काल राहत मिल सकें। 
There are lot of apprehensions expressed in the media about the problem of blockage of working capital for exporters post-GST. There are various figures also being discussed on the blockage of such funds, which are wild estimates. Such media reports are not based on facts.
i) First of all, it may be mentioned that in respect of 66% value of exports, exporters have preferred the duty drawback scheme instead of taking actual refund of input taxes in the pre-GST regime. Duty drawback scheme was actually extended in the post-GST regime for a period of 3 months, i.e. upto 30th September, 2017, subject to that exporter not taking input tax credit under GST. This means that as of now, for 66% of the value of exports, there is no blockage of funds.
ii) The remaining 33% of exporters always used to prefer a normal refund route for taxes paid on inputs for Central Excise separately and for VAT separately and that was made available to them only after the actual exports took place and, for such class of exporters, earlier also there was a normal blockage of funds for a period of 5 – 6 months at least except for those using facility of advance authorisation. Hence, the problem is not as grievous as it is made out to be. Notwithstanding this, the Committee on Exports is working on issues of export sector.
iii) A lot of people are speculating that the refund for inputs in case of exports under GST will be available only when regular form GSTR 3 is filed for every month. This is not the case. We are trying to find a way of giving refund by linking form GSTR 1 with form GSTR 3B and, therefore, for the month of July, where form GSTR 1 is already filed, the authorities would be in a position to process the refund applications. Therefore, the exporters, who have not yet filed form GSTR 1 for July 2017, may be advised to file it immediately and not to wait till the deadline. GSTN application for refund is also getting ready. But, in the meantime, we are also finding other ways of giving refund, if necessary through a manual procedure.
iv) The Committee on Export set up by the GST Council met on 19th & 20th August, 2017 and have discussed various methods of resolving the issue of blockage of funds for the exporters. The Committee also interacted with the exporters of eight sectors who made detailed presentations on the problems being faced by them. The Committee would present the solution to their problems before the GST Council as soon as possible.
v) In the meantime, the authorities of State Governments as well as Central Government have been requested to clear the pending refund claims of Central Excise and VAT for the pre-GST period, so that the exporters will get immediate relief.
(Source: pib.nic.in)

Rajanish kant
Tax Payers Advised To Confirm Identities Of Income Tax Search Authorities, contact on this no-9013850099
Tax Payers Advised To Confirm Identities Of Income Tax Search Authorities
The Income Tax Department in the Delhi region regularly conducts search/survey/verification exercises in case of suspected tax evaders to uncover concealment of undisclosed income/assets as per the law.
However, instances have been brought to the notice of department wherein, certain unscrupulous elements have conducted unauthorized / illegal searches through forged identity cards claiming to be from Income Tax Department, Delhi.
It is reiterated that the tax payers is well within his rights to seek & inspect the warrant of authorisation, confirm the identities of authorized Income Tax Authorities mentioned on the warrant. The assessee can seek the telephone numbers of immediate supervisory officers of the search/survey party for the purpose of verification of genuineness.
In case, any doubts still persists then the Income Tax Department can be contacted on the following number 9013850099 for the specified purpose of confirmation of identities of officers/officials working in the Delhi region.
(Source: pib.nic.in)

Rajanish kant
Notification Issued For GST Actionable Claim On Branded Food Products , effective from 22nd Sept.
Notification Issued For GST Actionable Claim On Branded Food Products
The GST Council, in its 21st meeting held on 9th September, 2017 at Hyderabad has, inter alia, recommended that for 5% GST rate on cereals, pulses and flours etc. put up in unit container and bearing a registered brand name:

a) A brand registered as on 15.05.2017 under the Trademarks Act, 1999 shall be deemed to be a registered brand for the purposes of levy of 5% GST, irrespective of whether or not such brand is subsequently deregistered.

b) A brand registered as on 15.05.2017 under the Copyright Act, 1957 shall also be treated as a registered brand for the purposes of levy of 5% GST.

c) A brand registered as on 15.05.2017 under any law for the time being in force in any other country shall also be deemed to be a registered brand for the purposes of levy of 5% GST.

d) A mark or name in respect of which actionable claim is available shall be deemed to be a registered brand name for the purposes of levy of 5% GST.

2. Notification Nos. 27/2017-central tax(rate), 28/2017-central tax(rate), 27/2017-Integrated tax(rate), 28/2017-Integrated tax(rate), 27/2017-Union territory tax(rate), 28/2017-Union territory tax(rate), giving effect to the Council’s recommendations relating to changes in GST rates on goods and conditions appended thereto have been issued on 22nd September, 2017.

3. Regarding aforesaid recommendations of the Council, these notifications, interalia, provide that 5% GST will apply if on brand name [as defined in the notification] an actionable claim or enforceable right in court of law is available. In this context, these notifications also provide that this 5% GST will, however, not apply if the person concerned voluntarily foregoes any actionable claim or enforceable right on such brand name, subject to the conditions that he:

a) files an affidavit to the effect that he is voluntarily foregoing his actionable claim or enforceable right on such brand name with the jurisdictional Commissioner of Central Tax or State Tax, or the jurisdictional officer of Union Territory Tax, as the case may be, and

b) prints in indelible ink, both in English and local language on each such unit container, that in respect of brand name printed on the unit containers he has voluntarily foregone his actionable claim or enforceable right.

4. The above mentioned notifications are effective from 22nd September, 2017. 
(Source: pib.nic.in)

Rajanish kant
Beyourmoneymanager Audio News; पैसों से जुड़ी आज (22-09-2017) की बड़ी खबर

Beyourmoneymanager Audio News; पैसों से जुड़ी आज (22-09-2017) की बड़ी खबर

Rajanish kant Friday, September 22, 2017
भारतीय शेयर बाजार आज औंधे मुंह गिरे, सेंसेक्स 448 अंक फिसला, निफ्टी 10 हजार के नीचे फिसला
((अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को गिरे, डाओ में लगातार 9 दिनों की तेजी पर ब्रेक 
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Rajanish kant
US डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत (22 सितंबर)($1=₹ 64.9596)
अमेरिकी डॉलर के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक की संदर्भ दर
भारतीय रिज़र्व बैंक की दिनांक 22 सितंबर 2017 को अमेरिकी डॉलर के लिए संदर्भ दर  64.9596 है।
पिछले दिन (21 सितंबर 2017) के लिए समतुल्‍य दर  64.5256 थी।
अमेरिकी डॉलर के लिए संदर्भ दर और पारस्‍परिक मुद्रा-दरों की मध्‍य दरों के आधार पर रुपये के लिए यूरो, ग्रेट ब्रिटेन पाउंड और जापानी येन की विनिमय दरें इस प्रकार हैं :
मुद्रातारीख
21 सितंबर 201722 सितंबर 2017
1 यूरो76.740377.7566
1 ग्रेट ब्रिटेन पाउंड87.154788.3061
100 जापानी येन57.3057.99
टिप्‍पणी : एसडीआर- रुपया दर संदर्भ दर पर आधारित होगी।
Source: rbi.org.in
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