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आर्थिक आजादी के लिए 6 टिप्स; 6 Tips for Financial Freedom


 

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Rajanish Kant बुधवार, 25 जनवरी 2023
देश की अबतक की अधिकांश यात्रा आनंददायक रही है, 10% विकास दर हासिल करना जरूरी: राष्ट्रपति
भारत के गणतंत्र दिवस 2017 की पूर्व संध्या पर भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी का राष्ट्र के नाम संदेश
 प्यारे देशवासियो,
हमारे राष्ट्र के अड़सठवें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या परमैं भारत और विदेशों में बसे आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूं। मैं सशस्त्र बलोंअर्द्धसैनिक बलों और आंतरिक सुरक्षा बलों के सदस्यों को अपनी विशेष बधाई देता हूं। मैं उन वीर सैनिकों और सुरक्षाकर्मियों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं जिन्होंने भारत की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने और कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया।
भाइयो और बहनो,
2.  15 अगस्त, 1947 को जब भारत स्वतंत्र हुआहमारे पास अपना कोई शासन दस्तावेज नहीं था। हमने 26 जनवरी, 1950 तक प्रतीक्षा कीजब भारतीय जनता ने इसके सभी नागरिकों के लिए न्यायस्वतंत्रतासमानता तथा लैंगिक और आर्थिक समता के लिए स्वयं को एक संविधान सौंपा। हमने भाईचारेव्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता को प्रोत्साहित करने का वचन दिया।  
उस दिन हम विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र बन गए।
3.  लोगों के विश्वास और प्रतिबद्धता ने हमारे संविधान को जीवन प्रदान किया और हमारे राष्ट्र के संस्थापकों नेबुद्धिमत्ता और सजगता के साथ भारी क्षेत्रीय असंतुलन और बुनियादी आवश्यकताओं से भी वंचित विशाल नागरिक वर्ग वाली एक गरीब अर्थव्यवस्था की तकलीफों से गुजरते हुएनए राष्ट्र को आगे बढ़ाया।
4.  हमारे संस्थापकों द्वारा निर्मित लोकतंत्र की मजबूत संस्थाओं को यह श्रेय जाता है कि पिछले साढ़े छ: दशकों से भारतीय लोकतंत्र अशांति से ग्रस्त क्षेत्र में स्थिरता का मरूद्यान रहा है। 1951 में 36 करोड़ की आबादी की तुलना मेंअब हम 1.3 अरब आबादी वाले एक मजबूत राष्ट्र हैं। उसके बावजूदहमारी प्रति व्यक्ति आय में दस गुना वृद्धि हुई हैगरीबी अनुपात में दो तिहाई की गिरावट आई हैऔसत जीवन प्रत्याशा दुगुनी से अधिक हो गई हैऔर साक्षरता दर में चार गुना बढ़ोतरी हुई है। आज हम विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था हैं। हम वैज्ञानिक और तकनीकी जनशक्ति के दूसरे सबसे बड़े भंडारतीसरी सबसे विशाल सेनान्यूक्लीयर क्लब के छठे सदस्यअंतरिक्ष की दौड़ में शामिल छठे सदस्य और दसवीं सबसे बड़ी औद्योगिक शक्ति हैं। एक निवल खाद्यान्न आयातक देश से भारत अब खाद्य वस्तुओं का एक अग्रणी निर्यातक बन गया है। अब तक की यात्रा घटनाओं से भरपूरकभी-कभी कष्टप्रदपरंतु अधिकांश समय आनंददायक रही है।  
5.  जैसे हम यहां तक पहुंचे हैं वैसे ही और आगे भी पहुंचेंगे। परंतु हमें बदलती हवाओं के साथ तेजी से और दक्षतापूर्वक अपने रुख में परिवर्तन करना सीखना होगा। प्रगतिशील और वृद्धिगत विकास में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की उन्नति से पैदा हुए तीव्र व्यवधानों को समायोजित करना होगा। नवाचारऔर उससे भी अधिक समावेशी नवाचार को एक जीवनशैली बनाना होगा। शिक्षा को प्रौद्योगिकी के साथ आगे बढ़ना होगा। मनुष्य और मशीन की दौड़ मेंजीतने वाले को रोजगार पैदा करना होगा। प्रौद्योगिकी अपनाने की रफ्तार के लिए एक ऐसे कार्यबल की आवश्यकता होगी जो सीखने और स्वयं को ढालने का इच्छुक हो। हमारी शिक्षा प्रणाली कोहमारे युवाओं को जीवनपर्यंत सीखने के लिए नवाचार से जोड़ना होगा।
प्यारे देशवासियो,  
6.  हमारी अर्थव्यवस्था चुनौतीपूर्ण वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बावजूदअच्छा प्रदर्शन करती रही है। 2016-17 के पूर्वाद्ध मेंपिछले वर्ष की तरहइसमें 7.2 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई और इसमें निरंतर उभार दिखाई दे रहा है। हम मजबूती से वित्तीय दृढ़ता के पथ पर अग्रसर हैं और हमारा मुद्रास्फीति का स्तर आरामदायक है। यद्यपि हमारे निर्यात में अभी तेजी आनी बाकी हैपरंतु हमने विशाल विदेशी मुद्रा भंडार वाले एक स्थिर बाह्य क्षेत्र को कायम रखा है।  
7.  काले धन को बेकार करते हुए और भ्रष्टाचार से लड़ते हुएविमुद्रीकरण से आर्थिक गतिविधि मेंकुछ समय के लिए मंदी आ सकती है। लेन-देन के अधिक से अधिक नकदीरहित होने से अर्थव्यवस्था की पारदर्शिता बढ़ेगी।
भाइयो और बहनो
8.  स्वतंत्र भारत में जन्मीनागरिकों की तीन पीढ़ियाँ औपनिवेशिक इतिहास के बुरे अनुभवों को साथ लेकर नहीं चलती हैं। इन पीढ़ियों को स्वतंत्र राष्ट्र में शिक्षा प्राप्त करनेअवसरों को खोजने और एक स्वतंत्र राष्ट्र में सपने पूरे करने का लाभ मिलता रहा है। इससे उनके लिए कभी-कभी स्वतंत्रता को हल्के में लेनाअसाधारण पुरुषों और महिलाओं द्वारा  इस स्वतंत्रता के लिए चुकाये गए मूल्यों को भूल जानाऔर स्वतंत्रता के पेड़ की निरंतर देखभाल और पोषण की आवश्यकता को विस्मृत कर देना  आसान हो जाता है। लोकतंत्र ने हम सब को अधिकार प्रदान किए हैं। परंतु इन अधिकारों के साथ-साथ दायित्व भी आते हैंजिन्हें निभाना पड़ता है। गांधीजी ने कहा, ‘आजादी के सर्वोच्च स्तर के साथ कठोर अनुशासन और विनम्रता आती है। अनुशासन और विनम्रता के साथ आने वाली आजादी को अस्वीकार नहीं किया जा सकताअनियंत्रित स्वच्छंदता असभ्यता की निशानी हैजो अपने और दूसरों के लिए समान रूप से हानिकारक है।
प्यारे देशवासियो,
9. आज युवा आशा और आकांक्षाओं से भरे हुए हैं। वे अपने जीवन के उन लक्ष्यों को लगन के साथ हासिल करते हैंजिनके बारे में वे समझते हैं कि वे उनके लिए प्रसिद्धिसफलता और प्रसन्नता लेकर आएंगे। वे प्रसन्नता को अपना अस्तित्वपरक उद्देश्य मानते हैं जो स्वाभाविक भी है। वे रोजमर्रा की भावनाओं के उतार-चढ़ाव मेंऔर अपने लिए निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति में प्रसन्नता खोजते हैं। वे रोजगार के साथ-साथ जीवन का प्रयोजन भी ढूंढते हैं। अवसरों की कमी से उन्हें निराशा और दुख होता है जिससे उनके व्यवहार में क्रोधचिंतातनाव और असामान्यता पैदा होती है। लाभकारी रोजगारसमुदाय के साथ सक्रिय जुड़ावमाता-पिता के मार्गदर्शन,  और एक जिम्मेवार समाज की सहानुभूति के जरिए उनमें समाज अनुकूल आचरण पैदा करके इससे निपटा जा सकता है।   
भाइयो और बहनो,
10.  मेरे एक पूर्ववर्ती ने मेरी मेज पर फ्रेम किया हुआ कथन छोड़ा जो इस प्रकार था: शांति और युद्ध में सरकार का उद्देश्य शासकों और जातियों की महिमा नहीं है बल्कि आम आदमी की खुशहाली है।’ खुशहाली जीवन के मानवीय अनुभव का आधार है। खुशहाली समान रूप से आर्थिक और गैर आर्थिक मानदंडों का परिणाम है। खुशहाली के प्रयास सतत विकास के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं,  जिसमें मानव कल्याणसामाजिक समावेशन और पर्यावरण को बनाए रखना शामिल है। हमें अपने  लोगों की खुशहाली और बेहतरी को लोकनीति का आधार बनाना चाहिए। 
11.  सरकार की प्रमुख पहलों का निर्माण समाज के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन का लक्ष्य गांधीजी की 150वीं जयंती के साथ 02 अक्तूबर, 2019 तक भारत को स्वच्छ बनाना है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बहाली के लिए मनरेगा जैसे कार्यक्रमों पर बढ़े व्यय से रोजगार में वृद्धि हो रही है। 110 करोड़ से अधिक लोगों तक अपनी वर्तमान पहुंच के साथ आधार लाभों के सीधे अंतरणआर्थिक नुकसान रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद कर रहा है। डिजिटल भारत कार्यक्रम डिजिटल ढांचे के सर्वव्यापक प्रावधान और नकदीरहित आर्थिक लेन-देन साधनों के द्वारा एक ज्ञानपूर्ण अर्थव्यवस्था का निर्माण कर रहा है। स्टार्ट-अप इंडिया और अटल नवाचार मिशन जैसी पहलें नवाचार और नए युग की उद्यमिता को प्रोत्साहन दे रही हैं। कौशल भारत पहल के अंतर्गतराष्ट्रीय कौशल विकास मिशन 2022 तक 30 करोड़ युवाओं को कौशलयुक्त बनाने के लिए कार्य कर रहा है।
भाइयो और बहनो
12.  मुझे पूरा विश्वास है कि भारत का बहुलवाद और उसकी सामाजिकसांस्कृतिकभाषायी और धार्मिक अनेकता हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। हमारी परंपरा ने सदैव असहिष्णु’ भारतीय नहीं बल्कि तर्कवादी’ भारतीय की सराहना की है। सदियों से हमारे देश में विविध दृष्टिकोणोंविचारों और दर्शन ने शांतिपूर्वक एक दूसरे के साथ स्पर्द्धा की है। लोकतंत्र के फलने-फूलने के लिएएक बुद्धिमान और विवेकपूर्ण मानसिकता की जरूरत है। एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए विचारों की एकता से अधिकसहिष्णुताधैर्य और दूसरों कासम्मान जैसे मूल्यों का पालन करने की आवश्यकता होती है। ये मूल्य प्रत्येक भारतीय के हृदय और मस्तिष्क में रहने चाहिएजिससे उनमें समझदारी और दायित्व की भावना भरती रहे। 
प्यारे दशवासियो,
13.  हमारा लोकतंत्र कोलाहलपूर्ण है। फिर भी जो लोकतंत्र हम चाहते हैं वह अधिक होकम न हो। हमारे लोकतंत्र की मजबूती इस सच्चाई से देखी जा सकती है कि 2014 के आम चुनाव में कुल 83 करोड़ 40 लाख मतदाताओं में से 66 प्रतिशत से अधिक ने मतदान किया। हमारे लोकतंत्र का विशाल आकार हमारे पंचायती राज संस्थाओं में आयोजित किए जा रहे नियमित चुनावों से झलकता है। फिर भी हमारे कानून निर्माताओं को व्यवधानों के कारण सत्र का नुकसान होता है जबकि उन्हें महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस करनी चाहिए और विधान बनाने चाहिए। बहसपरिचर्चा और निर्णय पर पुन:ध्यान देने के सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।
14. जबकि हमारा गणतंत्र अपने अड़सठवें वर्ष में प्रवेश कर रहा हैहमें यह स्वीकार करना चाहिए कि हमारी प्रणालियां श्रेष्ठ नहीं हैं।  त्रुटियों की पहचान की  जानी चाहिए और उनमें सुधार लाना चाहिए। स्थायी आत्मसंतोष पर सवाल उठाने होंगे। विश्वास की नींव को मजबूत बनाना होगा। चुनावी सुधारों पर रचनात्मक परिचर्चा करने और स्वतंत्रता के बाद के उन शुरुआती दशकों की परंपरा की ओर लौटने का समय आ गया है जब लोक सभा और राज्य विधान सभाओं के चुनाव एक साथ आयोजित किए जाते थे। राजनीतिक दलों के विचार-विमर्श से इस कार्य को आगे बढ़ाना चुनाव आयोग का दायित्व है।
प्यारे देशवासियो,
    15. भयंकर रूप से प्रतिस्पर्द्धी विश्व मेंहमें अपनी जनता के साथ किए गए वादे पूरा करने के लिए पहले से अधिक परिश्रम करना होगा।    
        हमें और अधिक परिश्रम करना होगा क्योंकि गरीबी से हमारी लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। हमारी अर्थव्यवस्था को अभी भी गरीबी पर तेज प्रहार करने के लिए दीर्घकाल में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि करनी होगी। हमारे देशवासियों का पांचवां हिस्सा अभी तक गरीबी रेखा से नीचे बना हुआ है। गांधीजी का प्रत्येक आंख से हर एक आंसू पोंछने का मिशन अभी भी अधूरा है।
  हमें अपने लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए और प्रकृति के उतार-चढ़ाव के प्रति कृषि क्षेत्र को लचीला बनाने के लिए और अधिक परिश्रम करना है। हमें जीवन की श्रेष्ठ गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिएगांवों के हमारे लोगों को बेहतर सुविधाएं और अवसर प्रदान करने होंगे।
  हमें विश्वस्तरीय विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के सृजन द्वारा युवाओं को और अधिक रोजगार अवसर प्रदान करने के लिए अधिक परिश्रम करना है। घरेलू उद्योग की स्पर्द्धात्मकता में गुणवत्ताउत्पादकता और दक्षता पर ध्यान देकर सुधार लाना होगा।
  हमें अपनी महिलाओं और बच्चों को सुरक्षा और संरक्षा प्रदान करने के लिए और अधिक परिश्रम करना है। महिलाओं को सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने में सक्षम बनना चाहिए। बच्चों को पूरी तरह से अपने बचपन का आनंद उठाने में सक्षम होना चाहिए।  
  हमें अपने उन उपभोग तरीकों को बदलने के लिए और अधिक परिश्रम करना है जिनसे पर्यावरणीय और पारिस्थिकीय प्रदूषण हुआ है। हमें बाढ़भूस्खलन और सूखे के रूप मेंप्रकोप को रोकने के लिए प्रकृति को शांत करना होगा।
  हमें और अधिक परिश्रम करना होगा क्योंकि निहित स्वार्थों द्वारा अभी भी हमारी बहुलवादी संस्कृति और सहिष्णुता की परीक्षा ली जा रही है। ऐसी स्थितियों से निपटने में तर्क और संयम हमारे मार्गदर्शक होने चाहिए।
  हमें आतंकवाद की बुरी शक्तियों को दूर रखने के लिए और अधिक परिश्रम करना है। इन शक्तियों का दृढ़ और निर्णायक तरीके से मुकाबला करना होगा। हमारे हितों की विरोधी इन शक्तियों को पनपने नहीं दिया जा सकता।
  हमें अपने उन सैनिकों और सुरक्षाकर्मियों की बेहतरी को सुनिश्चित करने के लिए और अधिक परिश्रम करना हैजो आंतरिक और बाह्य खतरों से हमारी रक्षा करते हैं।
  हमें और अधिक परिश्रम करना है क्योंकि;
हम सभी अपनी मां के लिए एक जैसे बच्चे हैं;
और हमारी मातृभूमिहम में से प्रत्येक सेचाहे हम कोई भी भूमिका निभाते हों;
हमारे संविधान में निहित मूल्यों के अनुसार;
निष्ठासमर्पण और दृढ़ सच्चाई के साथ;
अपना कर्तव्य पूरा करने के लिए कहती है।

जय हिंद!

(Source: pib.nic.in)

Rajanish Kant बुधवार, 25 जनवरी 2017
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