जीएसटी से बैंकिंग और इंश्योरेंस सेवाएं महंगी होंगी

एक जुलाई से बैंकिंग और इंश्योरेंस सेवाओं के लिए आपको ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने बैंकिंग और इंश्योरेंस जैसी फाइनेंशियल सेवाओं को 18 प्रतिशत जीएसटी के दायरे में रखा है। अब तक इसके लिए 15 प्रतिशत सर्विस चार्ज देना पड़ रहा है। 
इसको सीधे-सीधे ऐसा समझ सकते हैं अब तक अगर कोई व्यक्ति बैंकों से 100 रुपए का लेन-देन करता है तो 15 रुपए देना होता है, वहीं एक जुलाई से 18 रुपए यानी 3 रुपए ज्यादा देना पड़ेगा। 
आपको तो पता ही होगी कि बैंक अकाउंट में मिनिमम बैलेंस नहीं रखने, फ्री कैश ट्रांजैक्शन की लिमिट खत्म होने के बाद कैश ट्रांजैक्शन, चेक बुक लेने, अकाउंट बंद कराने, लिमिट से ज्यादा एटीएम से पैसे निकालने, ऑनलाइन फंड ट्रांसफर करने पर अभी 15 प्रतिशत सर्विस चार्ज वसूलते हैं, जो कि एक जुलाई से बढ़कर 18 प्रतिशत हो जाएगा। 
इसी तरह, लाइफ इंश्योरेंस, हेल्थ इंश्योरेंस, मोटर इंश्योरेंस भी महंगा हो जाएगा।  प्रीमियम पर फिलहाल 15 प्रतिशत सर्विस चार्ज देना होता है, लेकिन एक जुलाई से 18 प्रतिशत जीएसटी देना होगा। मतलब अगर आप 100 रुपए प्रीमियम भरते हैं तो अभी जो आपको 15 रुपए सर्विस चार्ज देना होता है, वह एक जुलाई के बाद बढ़कर 18 रुपए हो जाएगा। लेकिन, शेयर और म्युचुअल फंड खरीद पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। ऐसा इसलिए कयोंकि सेक्‍युरिटीज को जीएसटी से बाहर रखा गया है। ऐसे में म्‍यूचुअल फंड या शेयर खरीदने पर फाइनेंशियल सर्विसेज पर सर्विस टैक्‍स बढ़ने का असर नहीं होगा।  


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