सेबी ने बोर्ड बैठक में कई अहम फैसले लिए, आपके लिए जानना जरूरी है

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने शेयर बाजार, कमोडिटी बाजार और म्युचुअल फंड में निवेश की प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए कई अहम फैसले लिए। आइए, जानते हैं उन फैसलों में क्या-क्या शामिल है.

1- ई-वॉलेट से म्युचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं, लेकिन प्रति वित्त वर्ष 50 हजार रुपए से ज्यादा का निवेश नहीं कर सकते। इसके अलावा, नकदी, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिये ई वॉलेट में डाली गई बकाया राशि का इस्तेमाल केवल म्युचुअल फंड की खरीद में ही की जा सकती है। साथ ही, क्रेडिट कार्ड, कैश बैक, प्रोत्साहन योजनाओं के जरिये ई-वॉलेट में आई रकम के म्युचुअल फंड स्कीम खरीदने की अनुमति नहीं होगी। यानी अब  पेटीएम, मोबीक्विक और फ्रीचार्ज जैसे ई वॉलेट के जरिये म्युचुअल फंडों में निवेश की भी इजाजत होगी। 

2-कमोडिटी डेरिवेटिव्ज मार्केट में ऑप्शन ट्रेडिंग की मंजूरी: सेबी का इरादा शेयर बाजार को गहरा बनाना और उसमें लिक्विडिटी को बढ़ाना है। इसके लिए कमोडिटी डेरिवेटिव्ज मार्केट में ऑप्शन ट्रेडिंग की मंजूरी दी गई है। इसके लिए प्रतिभूति अनुबंध नियमन (शेयर बाजार और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन) नियमन, 2012 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई ैहै। सेबी अब कमोडिटी डेरिवेटिव्ज एक्सचेंजों में ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगी। सेबी के बोर्ड ने इक्विटी बाजारों और जिंस बाजारों में सौदों के लिए एकीकृत लाइसेंस जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। 
इस कदम से घरेलू जिंस बाजार का दायरा बढ़ेगा और किसानों के साथ-साथ दूसरे भागीदारों को भी हेजिंग का सस्ता विकल्प मिल जाएगा। सेबी ने यह भी ऐलान किया कि अबसे शेयर ब्रोकर भी जिंस बाजार में काम कर सकेंगे और जिंस ब्रोकर शेयर बाजार में। दोनों बाजारों के लिए एक ही लाइसेंस की जरूरत होगी। इस कदम से एमसीएक्स को इक्विटी कारोबार शुरू करने में मदद मिलेगी जबकि एनएसई और बीएसई भी जिंस डेरिवेटि

3- सेबी के बोर्ड ने अब से ब्रोकरों और क्लियरिंग सदस्यों को जिंस डेरिवेटिव्ज के साथ शेयर बाजार में कामकाज करने के लिए एकल लाइसेंस देने का फैसला किया है। इससे शेयर बाजार में कामकाज करने वाले ब्रोकर या क्लियरिंग सदस्य अलग इकाई स्थापित किये बिना ही जिंस डेरिवेटिव्ज में खरीद-बिक्री या सौदा कर सकते सकेंगे। शेयर बाजार और कमोडिटी डेरिवेटिव्ज बाजार में शेयर ब्रोकरों के एकीकरण से ट्रेडिंग और निपटान तंत्र, जोखिम प्रबंधन, निवेशक शिकायत निपटान आदि में तालमेल बनेगा। इससे निवशकों, ब्रोकरों, शेयर एक्सचेंजों और सेबी को भी फायदा होगा। 

4-डेट सिक्योरिटीज के लिए नए ढांचे की मंजूरी: सेबी ने कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार को विस्तार और मजबूती देने की कोशिशों के तहत डेट सिक्योरिटीज के लिए नए ढांचे को भी मंजूरी दी। इसके तहत आईएसआईएन की न्यूनतम संख्या के जरिये कॉर्पोरेट बॉन्ड के लिए सेकेंडरी मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाई जाएगी। नए ढांचे के तहत किसी निगमकर्ता को हर वित्तीय वर्ष में मैच्योर होने वाली अधिकतम 12 आईएसआईएन की अनुमति होगी। 

5- सेबी ने लिक्विड योजनाओं में तुरंत भुगतान की भी अनुमति दे दी। बाजार नियामक ने 500 करोड़ रुपये से अधिक नेटवर्थ वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को पात्र संस्थागत खरीदार का दर्जा देने की भी घोषणा की। इससे इन कंपनियों को आईपीओ बाजार में अधिक भूमिका मिल जाएगी क्योंकि किसी आईपीओ में लगभग आधा हिस्सा क्यूआईबी के लिए आरक्षित होता है। इससे पहले गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को गैर संस्थागत श्रेणी में निवेश करना पड़ता था जिसमें  केवल 15 फीसदी हिस्सा आरक्षित होता था।
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