'अगले 18 महीने तक लोन शायद ही सस्ता हो'


'अगले 18 महीने तक RBI शायद ही नीतिगत दर घटाये'

आगे और लोन सस्ता होने का इंतजार कर रहे लोगों को निराशा हाथ लग सकती है। महंगाई दर के बढ़ते रुझान को देखते हुए कुछ जानकारों का कहना है कि 2018 तो क्या 2019 तक भी रिजर्व बैंक शायद ही नीतिगत दरों में और कटौती करे। रॉयटर्स के एक पोल के मुताबिक, फरवरी में तटस्थ मौद्रिक नीति का रुख अपनाने और मुद्रास्फीति में संभावित वृद्धि के संबंध में चिंता होने के बावजूद भारतीय रिज़र्व बैंक अगले साल तक ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। 

आपको बता दें कि अप्रैल में मौद्रिक पॉलिसी समिति की बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को तो जस का तस रखा, लेकिन रिवर्स रेपो रेट में चौथाई परसेंट की बढ़ोतरी कर दी थी ताकि सरकार की नोटबंदी मुहिम से सिस्टम में आई अतिरिक्त तरलता कमकी जा सके। वाणिज्यिक बैंकों जिस रेट पर रिजर्व बैंक ब्याज देता है, वह रिवर्स रेपो रेट कहलाता है। 
10 से 19 अप्रैल के बीच आयोजित रॉयटर्स के इस पोल में 35 से अधिक अर्थशास्त्रियों ने भाग लिया था। उनमें औसत सहमति बनी कि नीतिगत रेपो रेट कम से कम 2018 की चौथी तिमाही तक 6.25 प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट 6.00 प्रतिशत रहेगा।  

क्रिसिल के प्रमुख अर्थशास्त्री धर्मकीति जोशी ने लिखा, "मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक की चिंता का सबसे बड़ी वजह रही है। यह देखते हुए, एक नरम  मौद्रिक नीति (नीतिगत दरों में कटौती का रुख) का रुख फिलहाल खत्म हो गया है।"

मार्च में खुदरा महंगाई दर में साल दर साल के आधार पर 3.81 फीसदी की बढ़ोतरी हुई जो कि अक्टूबर 2016 के बाद सबसे अधिक रही है। यह दर आरबीआई की लक्षित महंगाई दर  4 परसेंट के करीब है। इस वजह से हो सकता है कि केंद्रीय बैंक नीतिगत दरों में शायद ही कटौती करे। 

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वित्त वर्ष 2017/18  मुद्रास्फीति की दर 5.0 प्रतिशत होगी। यह आरबीआई की हाल की भविष्यवाणियों के करीब है। रिजर्व बैंक ने अप्रैल की मौद्रिक पॉलिसी बैठक में  मौजूदा वित्त वर्ष की पहले छमाही में महंगाई दर 4.5 प्रतिशत और दूसरी छमाही में 5.0 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। 

हालांकि, ब्याज दर को लेकर रिजर्व बैंक का यह रुख बहुत कुछ मॉनसून पर निर्भर करता है। देश की ज्यादातर आबादी कृषि पर निर्भर है। अगर बारिश अच्छी होगी, तो फसल भी अच्छी होगी, जिससे महंगाई दर में कमी आने की उम्मीद है। इस वजह से हो सकता है कि रिजर्व बैंक नीतिगत दरों में कटौती का लाभ दे। 

मौसम विभाग के मुताबिक, भारत में इस वर्ष सामान्य वर्षा होने की उम्मीद है और इसका अच्छा वितरण होगा, जिससे कृषि और आर्थिक विकास से संबंधित चिंताएं कम हो सकती हैं। हाल के सर्वेक्षण में हालांकि अर्थशास्त्रिों की औसत सहमति कम से कम 201 9 तक ब्याज दरों में कोई परिवर्तन नहीं होने की बनी  है, लेकिन अधिकांश अर्थशास्त्री का ये भी मानना है कि केंद्रीय बैंक  शायद इस वर्ष के अंत में नीतिगत दरों में कटौती कर सकता है। लेकिन, यह बहुत कुछ मॉनसून पर निर्भर करता है। 

नोटबंदी के बाद सुधार: 
पिछले साल लागू हुई नोटबंदी का असर तेजी से कम होने की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में तेजी से वृद्धि कर सकती है। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले साल 8 नवंबर को अचानक उच्च मूल्य वाले नोटों 500 और 1000 रुपए के नोट पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की वजह से सिस्टम से  86 प्रतिशत नोट बाहर हो गए। इससे नकदी आधारित अर्थव्यवस्था में मांग में कमी आ गई।

लेकिन अर्थव्यवस्था वापस पटरी पर लौट रही है और इस साल सकल घरेलू उत्पाद 7.5 प्रतिशत और अगले साल 7.7 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा। रॉयटर्स पोल में भाग लेने वाले अर्थशास्त्रियों ने इसकी भविष्यवाणी की है।

यह इस वित्त वर्ष के लिए 7.7 प्रतिशत के अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुमानों के बराबर है।
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