लोन महंगा करने वालों में सिंडिकेट बैंक और OBC भी शामिल

6 जून को मोदी राज में रिजर्व बैंक द्वारा पहली बार रेपो रेट में चौथाई परसेंट का इजाफा किए जाने के बाद बैंकों द्वारा लगातार कर्ज महंगा किया जा रहा है। इंडियन बैंक, करुर वैश्य बैंक, HDFC बैंक,बैंक ऑफ इंडिया के बाद सिंडिकेट  बैंक और ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स यानी OBC  ने भी अलग-अलग अवधि के MCLR (धनराशि आधारित उधार दर, निधि आधारित उधार दर, कोष आधारित उधार दर - Marginal Cost of Funds based Lending Rate) में बढ़ोतरी कर दी है। MCLR वह फ्लोर रेट होता है जिस पर बैंक ग्राहकों को लोन देते हैं।

ओबीसी ने चुनिंदा अवधियों के एमसीएलआर 0.15 प्रतिशत तक बढ़ाये,जो कि 11 जून से लागू होगा।  बैंक ने एक साल और 6 महीने का एमसीएलआर 0.10 प्रतिशत बढ़ाकर क्रमश: 8.65% और  8.60%  कर दिया। एक महीने का एमसीएलआर 0.15 प्रतिशत बढ़ाकर 8.35 प्रतिशत, एक रात का एमसीएलआर 0.10 प्रतिशत बढ़ाकर 8.20 प्रतिशत जबकि 3 महीने का एमसीएलआर 0.10 बढ़ाकर 8.40 प्रतिशत कर दिया।

उधर, सिंडिकेट बैंक ने एक साल का एमसीएलआर 8.50 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.55 प्रतिशत कर दिया। नई दरें 10 जून से लागू होंगी। बैंक ने बाकी अवधियों का एमसीएलआर जस का तस रहने दिया है।

HDFC बैंक ने 7जून से एक साल के लोन पर एमसीएलआर 8.10 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.40 प्रतिशत कर दिया। वहीं HDFC बैंक तीन साल के लोन पर अब 8.70 प्रतिशत और 6 महीने के लोन पर 8.25 प्रतिशत ब्याज वसूलेगा।

उधर, बैंक ऑफ इंडिया ने एमसीएलआर में संशोधन करते हुए अब एक साल लोन पर 8.50 प्रतिशत, 6 महीने के लोन पर 7.90 प्रतिशत, 6 महीने के लोन पर 8.45 प्रतिशत ब्याज वसूलेगा। नई दरें 10 जून से लागू होंगी।

इससे पहले रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट बढ़ाए जाने के बाद इंडियन बैंक और करुर वैश्य बैंक ने अलग-अलग अवधि के MCLR (धनराशि आधारित उधार दर, निधि आधारित उधार दर, कोष आधारित उधार दर - Marginal Cost of Funds based Lending Rate) में बढ़ोतरी कर दी है जबकि बैंक ऑफ महाराष्ट्रा ने जल्द ही कर्ज महंगा करने के संकेत दिये हैं। इंडियन बैंक ने 3 महीने से लेकर 5 साल तक के लोन का एमसीएलआर 0.10 प्रतिशत बढ़ा दिया है। करुर वैश्य  बैंक ने भी 6 महीने से लेकर 1 साल तक के लोन का एमसीएलआर 0.10 प्रतिशत बढ़ा दिया है। 

वहीं स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा ने रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट बढ़ाए जाने के पहले ही कर्ज की दरों में बढ़ोतरी कर दी थी।

आपको बता दूं कि रिजर्व बैंक कमर्शियल बैंकों को जिस रेट पर कर्ज देता है वह रेपो रेट कहलाता है। बैंकों को कई बार पैसों की जरूरत होती है तो वो रिजर्व बैंक से रात भर के लिए कर्ज लेते हैं। अब यह कर्ज रिजर्व बैंक ने महंगा कर दिया है। तो जब बैंकों को ही लोन महंगा मिलेगा तो जाहिर है बैंक भी अपने ग्राहकों को महंगा लोन ही देंंगे। 

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