लोन पर घर, जेब खाली, डिफॉल्टर होने से कैसे बचेंगे ?

लोन पर कार हो, घर हो या फिर कोई और चीज हो, जबतक जेब में उसे चुकाने के पैसे होते हैं तबतक तो सबकुछ ठीकठाक रहता है लेकिन आफत तब शुरू होती है जब आपकी अचानक नौकरी चली जाती है या फिर लोन चुकाने के लिए आपके पास पैसे नहीं होते हैं। एक तो ईएमआई चुकाने का तनाव और ऊपर से ईएमआई नहीं चुकाने की स्थिति में डिफॉल्टर होने और घर के छीन जाने का भय। क्योंकि बैंक अपना पैसा वसूलने के लिए
आपके घर को तो छोड़ेगा नहीं।

आप लोन की किस्त नहीं चुकायेंगे तो बैंक के पास आपके घर पर कब्जा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।  लेकिन बैंक अंतिम हथियार के रूप में इसे अपनाते हैं। लिहाजा आपको जल्दी से कोई कदम उठाना पड़ेगा। भगवान ना करे, आपके साथ ऐसी स्थिति पैदा हो लेकिन किसी कारणवश आप ऐसी मुसीबत में फंस जाएं तो उसका समाधान भी आपके पास रहना चाहिए।

ऐसी स्थिति में क्या करें ? 
अगर आप घर की ईएमआई नहीं चुकाने की स्थिति में हैं तो सबसे पहले अपने कर्जदाता से बात करें और इस मुसीबत से निकलने का हल पूछें। अपने कर्जदाता से ये जान लें कि मुसीबत की इस घड़ी निकलने के लिए क्या-क्या विकल्प मौजूद हैं ? अगर लोन पर ब्याज दर में इजाफा किए जाने से आपके सामने संकट पैदा हुआ है तो आप अपने कर्जदाता से लोन के भुगतान की समय-सारिणी में बदलाव करने का आग्रह कर सकते हैं।

कर्जदाता से ईएमआई की रकम में बिना कमी किए भुगतान करने की अवधि बढ़ाने के लिए कह सकते हैं या फिर ईएमआई की रकम में कमी करके भुगतान की अवधि में इजाफा करने की अपील कर सकते हैं।

इसके अलावा कर्जदाता बैंक से आप अपने भविष्य की आमदनी या फिर अपनी सेविंग्स को बैंक के पास बतौर सिक्योरिटी रखकर लोन को रिस्ट्रक्चर करवा सकते हैं।

अनुशासित कर्जदार बताकर भी आप अपने कर्जदाता बैंक से कुछ राहत की उम्मीद कर सकते हैं। इसके लिए ईएमआई भुगतान की रसीद को एक फाइल में रखकर बैंक के पास ले जा सकते हैं।

डिफॉल्टर होने पर बैंक के पास विकल्प: 

अगर आप दो-तीन महीने तक किस्त नहीं चुकाते हैं तो बैंक आपको किस्त चुकाने का मौका देता है लेकिन अगर आपने छह महीने तक किस्त नहीं चुकाया तो बैंक आपके घर पर कब्जा कर सकता है और उसकी नीलामी कर सकता है। बैंक सबसे अंतिम विकल्प के रूप में आपके घर पर कब्जा करने जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर होता है।

Securitisation & Reconstruction of Financial Assets & Enforcement of  Security Interest Act, 2002 (SARFAESI) बैंक या कर्जदाता संस्था को बिना कानूनी हस्तक्षेप के एनपीए (नन-परफॉर्मिंग एसेट्स) रिकवर करने का अधिकार देता है। एक निश्चित समय तक ईएमआई डिफॉल्ट करने पर बैंक आपके लोन को एनपीए में शामिल कर लेता है फिर आपके घर पर कब्जे की प्रक्रिया शुरू कर देता हैं।

बैंक पहली बार डिफॉल्ट करने पर कुछ खास नहीं करता है। दूसरी बार डिफॉल्ट करने पर बैंक आपको रिमांइडर नोटिस भेज सकता है। तीसरी बार डिफॉल्ट करने के बाद बैंक आपको डिमांड नोटिस भेजकर बकाया भुगतान करने को कहेगा। बैंक किसी भी एसेट को एनपीए घोषित करने से पहले तीन महीने का इंतजार करता है। इस दौरान कर्जदार की तरफ से कोई रेस्पांस नहीं मिलने पर तीन महीने के बाद आधिकारिक तौर पर आपके घर
को एनपीए करार देता है और उसकी रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर देता है। जिसका अधिकार बैंक को SARFAESI कानून के जरिए मिला हुआ है।

जानकारों का कहना है कि बैंक या कर्जदाता संस्था कर्जदार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने के मुकाबले पैसा वसूल करने को तरजीह देते हैं। इसलिए कोई भी कानूनी कार्रवाई करने से पहले आमतौर पर बैंक अपने कर्जदार को छह महीने का समय देता है। इस प्रकिया के अंतिम चरण में कर्जदाता अपने कर्जदार को डेट रिकवरी ट्राइब्यूनल से नोटिस भिजवाता है।

इस दौरान भी आपको डिफॉल्ट से बचने का कोई उपाय नहीं सुझता है तो अपनी प्रोपर्टी को बेचकर लोन चुका  सकते हैं। इस संबंध में बैंक से आप बात कर सकते हैं।

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